लोकस्मृति में जीवित सम्राट: सिद्धराज जयसिंहदेव और सोलंकी शक्ति का उत्कर्ष-
बलवीर सिंह सोलंकी बासनी खलील -
पन्द्रह लख पखरेत, अस्सी लख पाय तुरंगा।
साठा लाख बड़ दन्त, उपर सवार चतुरंगा ।।
पांच लाख सामन्त, तीन करोड़ सिपलानो।
चौदह लाख बाणेत, एक लाख रावत और राणा।।
घूंधालो धूजे धरा, बीस लाख बाजंत बली।
सिद्धराज जयसिंह सो, मंडे न दूजो मंडली ।।
राव बड़वा,चारण,भाट, दमामी, शुभराज आदि के मुख से राजा सिद्धराज जयसिंहदेव सोलंकी के समय की यह काव्य भी सुनने में आता रहता है जो अतिश्योक्ति से खाली नहीं पाया जाता है।
यह काव्य राजा सिद्धराज जयसिंहदेव सोलंकी के यश, शक्ति और सुशासन का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इसमें वर्णित विशाल सेना, सामंतों की एकजुटता और युद्ध-तैयारी उस युग की संगठित प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य अनुशासन और राजकीय सामर्थ्य को उजागर करती है। अतिशयोक्ति होते हुए भी, यह लोककाव्य तत्कालीन समाज के मन में बसे आत्मविश्वास, सुरक्षा-बोध और राजनिष्ठा को सशक्त रूप से प्रकट करता है।
यह रचना दर्शाती है कि सिद्धराज जयसिंहदेव केवल विजेता सम्राट ही नहीं, बल्कि ऐसे शासक थे जिनके नेतृत्व में राज्य स्थिर, समृद्ध और संगठित था। सामंतों, रावतों और राणाओं की व्यापक सहभागिता उनके समावेशी नेतृत्व और प्रभावशाली राजनीतिक कौशल का प्रमाण है।
अंततः यह काव्य सोलंकी युग के वैभव, शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है, जो आज भी गौरव, प्रेरणा और एकता का संदेश देता है तथा सिद्धराज जयसिंहदेव को भारतीय इतिहास में एक आदर्श और प्रभावशाली सम्राट के रूप में स्थापित करता है।
जय सोमनाथ 🙏 🚩
,इसी सोलंकी वंश में जन्मे डॉक्टर कर्ण वीर सिंह रोहिला, बर्नवाल,संपूर्ण जीवन परिचय छपा है उनके चित्र के साथ ब्लॉग में उपलब्ध है।
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💬⚔️🚩 *महसूस कीजिए कि डॉक्टर कर्णवीर सिंह रोहिला जी की पुण्य आत्मा आपके साथ खड़ी है और अपने जीवंत विचारो को फलीभूत कराने में आपका साथ दे रही है*ok
*उनका सपना यही था कि विस्थापित होते होते परचून की हालत में बिखरे इस राजपूत समुदाय को उसकी खोई हुई पहचान रोहिला क्षत्रिय के रूप में तभी मिलेगी जब भावी पीढ़ी को अन्य रोजगार मिलेंगे और विपत्ति काल में जीवन यापन के लिए किए गए कार्य बदल जायेंगे,इसके लिए शिक्षा और रोजगार आवश्यक होगा और रोहिला राजपूत क्षत्रिय महाराजा के प्रतीक बिम्ब बनेंगे और उनका प्रचार होगा इतिहास पुनः दोहराएगा तो रोहिला राजपूत समाज का स्वरूप बदलता चला जायेगा*
*आज रोहिला क्षत्रिय समाज के साथ कुछ वैसा ही आप लोग करते जा रहे हैं प्रशिक्षण संस्थान भी है लगभग चार हजार रोहिला क्षत्रिय लड़के स्वरोजगार,सरकारी गैर सरकारी सर्विस से जरिए, अनेको प्रकार से जीवन यापन और परिवार का पालन पोषण कर रहे है और उन परिवारों के रोजगार भी बदलते जा रहे हैं ,रोहिला राजपूत इतिहास को सोशल मीडिया पर राजपूत सिरदारो ने इतना प्रचार किया के कोई भी अछूता नहीं रहा,रोहिला राजपूत समाज को उसका खोया गौरव मिलता जा रहा है*
*मुझे याद है,उनके विचारों से प्रभावित होकर उनके बड़े भाई सहारनपुर में अति प्रतिष्ठित एडवोकेट चौधरी ओम प्रकाश रोहिला जी ने भटनागर धर्म शाला जनक नगर में दिनांक १२ अगस्त १९८८ को कहा था कि जब तक कोई स्थान रुहेला बिरादरी को नही मिलता, कही मंदिर नही बनता ,कोई तीर्थ स्थान नही मिलता जिसके बारे में दूसरे लोग भी जाने कि यह है रुहेलदेव का मंदिर ,जैसे कश्मीर में सुना गया है रोहिल् देव मंदिर, तब तक आप को पहचान वापस मिलना कठिन कार्य है क्योंकि आपकी मानसिक शक्ति दम तोड चुकी है,कुछ न कुछ बनाओ चाहे एक मंदिर सहारनपुर में रुहेलदेव का ही बना दो जिसे लोग रोजाना देखे मंदिर रूहेलदेव का है*
*उनकी भाषा में जो उन्होंने कहा था तो उनके छोटे भाई डॉक्टर साहब कर्णवीर सिंह भी सुनते रहे और मन ही मन मुस्कराते रहे*
*मैने तभी बोला था फोटो फाइल में लगा है ,""कि रोहिला राजपूत है"" और उनके पूर्वजों के बलिदानों के कारण आज आप इस तरह की बैठक कर रहे है अन्यथा सजदा करते फिरते क्यों न उन्ही मे से किसी एक वीर राजा महाराजा सनातन रक्षक विधर्मी संहारक का मंदिर बनवा लो,उस समय इतना ही ज्ञान था मुझे*
*डॉक्टर साहब बोले थे-बेटा जी आपकी भावनाएं और सपने तभी पूरे होंगे जब आप इस संगठन से जुड़े रह कर चलोगे और अपनी भावनाओं ,इच्छाओं की पूर्ति में लगे रहोगे यह ऐसा प्लेट फार्म बनेगा जिस पर बैठ कर रोहिला राजपूत समाज गर्व की अनुभूति अवश्य करेगा*
*उनके आशीर्वाद से आज आपके महाराजा रणवीर सिंह रोहिला राजपूत की जन्म जयंती राज घरानों में राजा" भींडर" मेवाड़ रणधीर सिंह भींडर महाराज अपने महल में मनाते है,कुल दीप सिंह रोहिला हरियाणा जटौली वाले का प्रयास रंग लाता है-अनेक राजपूत हस्तियां, कुंवर अजय सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा,कुंवर राजेंद्र सिंह जी नरूका सेवा निवृत कर्नल राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय क्षत्रिय ज्योति मिशन,क्षत्रिय शिरोमणि अदम्य साहसी चौहान की अस्थियों को हजार साल बाद गुलामी की बेडियो से आतंकियों के चंगुल से लाने वाले भाई शेर सिंह राणा जी संस्थापक राजपा, ओकेंद्र राणा फ्रॉम हरियाणा युवाओं के दिलो की धड़कन,दादा महिपाल सिंह मकराना अध्यक्ष श्री राजपूत करणी सेना, दिवंगत हुए दादा सुखदेव सिंह गोगा महेड़ी ठाकुर पूर्ण सिंह ,कुंवर अजय सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा रजिस्टर्ड, अभय प्रताप सिंह राणा, जय वीर सिंह राणा श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना सहारनपुर अध्यक्ष श्री नीरज चौहान आदि जिनके नाम विश्व विख्यात है सोशल मीडिया पर इनके करोड़ों फोलोवर्स है वे रोहिला राजपूत वीर क्षत्रिय सम्राट महाराजा रणवीर सिंह जी का गुणगान करते है जन्म जयंती पूरे विश्व में मनवाते है,भाई शेर सिंह राणाजी अपने साथी भाई कुलदीप सिंह रोहिला और दादा नरेंद्र सिंह चौहान को साथ लाकर महान वीर विधर्मी विनाशक सनातन रक्षक राजपूत रोहिलखंड सम्राट रणवीर सिंह रोहिला के चित्र पर पूजा करके माल्यार्पण कर रहे है*
*उन्होंने प्राचीन रोहिला किला अपनी टीम के साथ देखा और बोला गंगा से भी पवित्र रोहिलखंड की अपने पूर्वजों के रक्त से रंजित उनके खून और हड्डियों से लतपथ धरती में तुझे आज प्रणाम करता हूं तेरी भूमि की माटी हल्दी घाटी की माटी सी पवित्र है,रोहिलखंड के रामपुर को सर जमीन राजा रणवीर सिंह रोहिला के जन्म से एक राजपूत तीर्थ बन गई है*
*क्या यह किसी चमत्कार से कम नजर आता है??????*
*ऐसे ही सहारनपुर के रामपुर (भांकला गांव) की धरती राजपूताना परंपरा संचालित करने वाले डॉक्टर कर्णवीर सिंह रोहिला के जन्म से पवित्र हुई उन्होंने यहां के एक समृद्ध किसान परिवार सोलंकी बरनवाल रोहिला राजपूत समाज में श्री सुगन सिंह रोहिला जी के घर छ: जून उन्नीस सो छत्तीस(06 जून 1936ईस्वी) को जन्म लिया था और अपने व्यवहार और कार्य से इस राजपूत रोहिला परिवार (भांकला)की भूमि को प्रतिष्ठित करने और राजपूत रोहिला खाप को सम्मान दिलाने में अपना जीवन सत्रह मार्च २००० को होली के दिन समाप्त कर दिया था, समाज के कार्यों में इतने खो गए थे कि राष्ट्र पति श्री शंकर दयाल शर्मा जी के फेमिली चिकित्सक होते हुए भी अपनी परवाह करने को समय नही निकाल पाए और अपना जीवन बलिदान कर दिया,ऐसे गांव( रामपुर) को मेरा कोटि कोटि प्रणाम जिसने रोहिला राजपूतों में अपनी संस्कृति का संचार करने के लिए ऐसे महान राजपूत सोलंकी बरनवाल रोहिला डॉक्टर कर्णवीर सिंह जी को इस समाज में जन्म देकर पुनरोद्धार और उत्कर्ष की राह दिखाई*
उनकी अभिलाषा और सपने साकार हो रहे हैं ,पुण्य आत्माए आकार ले रही है,इतिहास पुनः अपना गौरव प्राप्त करता जा रहा है,आज आपके रोहिला राजपूत समाज के साथ भारत का सभी राजपूत समाज कंधे से कंधा मिलाए खड़ा है दादा राजेंद्र सिंह परिहार राष्ट्रीय अध्यक्ष क्षत्रिय अस्तित्व न्याय मोर्चा,रोहिला राजपूत इतिहास संरक्षण में लगे है रोहिला राजपूत युवाओं को जोड़ रहे हैं जागृति चरमोत्कर्ष पर है वो दिन दूर नही रोहिलखंड के राजपूतों का इतिहास स्कूल सेलेब्स में पढ़ाए जायेगा रोहिला क्षत्रिय भी अन्य क्षत्रिय राजपूतों की तरह ही सामान्य जाति की सूची में उल्लिखित कराया जाएगा भारत का संपूर्ण राजपूत समाज आ गया मैदान में रोहिला राजपूतों के सम्मान में*
*एक यही तो है ,यही है आशीर्वाद डॉक्टर करण वीर सिंह रोहिला जी की पुण्य आत्मा के द्वारा दी जाती रही प्रेरणा का*
*आज एक रुहेल देव (,रोहिला राजपूत लोक देव ,सूर्य वंशी क्षत्रिय महाराजा रणवीर सिंह रोहिला) का मंदिर भी बना है क्षत्रिय सम्राट महाराजा रणवीर सिंह रोहिला चौक ,एक भव्य स्मारक,विश्व में सहारनपुर की शान एतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर प्राचीन रोहिला किला के सामने स्थित चौक का नाम है ,आज महाराजा रणवीर सिंह रोहिला चौक ,क्या यह किसी भव्य मंदिर से कम है,सचमुच यही जीवित खड़ा दृष्टव्य रोहिला क्षत्रिय पवित्र धाम????*
*उनके विचारों और उनके संगठन अखिल भारतीय रोहिला क्षत्रिय विकास परिषद में निष्ठा रखिए आपके सभी कार्य पूर्ण होंगे*
*आज राष्ट्र की राजधानी दिल्ली रोहिणी क्षेत्र में युवा साथी जय प्रकाश रोहिला जी के प्रयास से एक पार्क का नाम भी महान वीर राजपूत सम्राट रणवीर सिंह रोहिला जी के नाम से है,रोहिला क्षत्रिय चौक भी नागलोई में है,और सबसे पहले इस क्षेत्र में बड़ौत नगर में रोहिला राजपूत समाज की ओर से श्री अनूप सिंह रोहिला जी ने कराया था श्री मति सरला मालिक तत्कालीन नगर पालिका चेयर मैन के द्वारा एक मार्ग का नाम राजा रणवीर सिंह रोहिला मार्ग आज उनके पति विधायक के पी मालिक राज्य मंत्री जी भी हमारा साथ देते है ,और प्रेरित करते है कि जहाँ भी उनकी अवश्यकता हो वे खड़े होंगे और महाराजा रणवीर सिंह रोहिला जी के नाम पर नामकरण कराएंगे*
सहारनपुर प्राचीन रोहिला किला जो रोहिला राजाओं द्वारा निर्मित है,जिसमें आज जिला कारागार ब्रिटिश राज से प्रचलित है किंतु 18नवंबर सन 1920ईस्वी को ही अंग्रेजी शासन में जिसे भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में दिया हुआ है,जो आज एक राष्ट्रीय धरोहर है,के सामने स्थित महाराजा रणवीर सिंह रोहिला चौक पर लगाए गए शिला लेखों का अनावरण कुंवर बृजेश सिंह राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है,सिडको चेयरमैंन श्री वाई पी सिंह जैसे दिग्गज क्षत्रिय नेता एवं राजनीतिज्ञ इस चौक पर उपस्थिति दर्ज कराते तथा क्षत्रिय सम्राट महाराजा रणवीर सिंह रोहिला जी की भव्य प्रतिमा की अपने काफिले के साथ परिक्रमा करते है,क्या यह क्षत्रिय एकता अखंडता को बनाए रखने की एक परम्परा जो रोहिला क्षत्रिय समाज में डॉक्टर कर्ण वीर सिंह राणा द्वारा संचालित की गई थी उसका जीवित दर्शन नहीं है?
*डॉक्टर कर्णवीर सिंह रोहिला जी के ""हमे चाहिए स्वाभिमान""के उद्घोष को ध्यान में रखा वर्तमान न्यू जेनरेशन ने,जिस प्रेरणा के कारण आज युवक युवतियां प्रत्येक क्षेत्र में दर्शनीय भागीदारी कर अपना कैरियर बनाने में जुटे है,। अभिनय ,खेल , क्रिकेट कुश्ती,चिकित्सा ,मॉडलिंग एथलीट, बॉक्सिंग,गायन शिक्षा उच्च तम आई आई टी , सी पी एम टी, एन डी ए,आई ए एस,पी सी एस,भारतीय थल,जल तथा वायु सेना ,अंतरिक्ष आदि में अपना और परिवार तथा रोहिला राजपूत समाज का नाम बिना किसी आरक्षण सुविधा के गौरवान्वित किया है क्या वह किसी सार्थक प्रयास उनकी प्रेरणा के श्रोत से उत्पन जिज्ञासाएं प्रतीत नहीं होती ।इसी प्रकार रोहिला क्षत्रिय युवा शक्ति को उनके बताए रास्ते पर ही होगा*
रोहिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में भव्य पुस्तकालय है डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है जिससे लाभान्वित होकर छात्र छात्राएं आधुनिक शिक्षा प्राप्त करेंगे।
उनके सुपुत्र डॉक्टर शालीन सिंह रोहिला जी ने रोहिला क्षत्रिय समाज के उत्थान हेतु अनेक कार्य किए,आज वे भी पितृ स्थान पर ही पहुंच चुके है किंतु उनकी धर्मपत्नी डॉक्टर इंद्र जीत सिंह कौर आज भी चिकित्सा के क्षेत्र में उनके आशीर्वाद से ऊंचे आयाम पर है और दिन रात समाज सेवा को निस्वार्थ भाव से करती है,यह है डॉक्टर कर्णवीर सिंह रोहिला जी आत्मा को स्वयं के साथ महसूस करना और आशीर्वाद लेना।।
*सनातन धर्म की रक्षा के लिए उत्तर भारत का अकेला राजपूत वीर गंगा सिंह महेचा राठौड़ रोहिला राजपूत को कलायत (कैथल) के mudahad राजपुतो को साथ लेकर दुर्रानी अब्दाली ,रुहेला नजीब खान से भिड़ गया था और मराठा सेनापति के रूप में वीर गति पाई थी उन्ही की स्मृति में अंबाहेटा नकूड तिराहे पर वीर गंगा सिंह महेचा राठौड़ रोहिला राजपूत का स्मारक और उनकी रानी राम प्यारी देवी की सती समाधि बन कर तैयार किए जाने के प्रस्ताव आ रहे है,राजपूत स्मार्स्को को संरक्षित किया जा रहा है*
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में क्षत्रिय सम्राट महाराजा रणवीर सिंह रोहिला चौक का प्रस्ताव ,विचाराधीन है,वहां के महापौर ने पूरा आश्वासन दिया है, विश्व प्रसिद्ध नगर रूड़की में भी गंगनहर पर एक घाट तथा एक चौक का नामकरण क्षत्रिय सम्राट महाराजा रणवीर सिंह रोहिला के नाम पर किए जाने की पूरी संभावना है,वहां की युवा शक्ति पूरी लगन के साथ प्रयास कर रही है।
*तीर्थ नगरी हरिद्वार में उत्तराखंड में एक घाट जहा उनकी अस्थियां प्रवाहित हुई थी उस घाट का नाम होगा महाराजा रणवीर सिंह रोहिला घाट* चौक की स्थापना आदि ये सभी सोच और कार्य सम्पादन ही उनकी अभिलाषा थी जिसे आप सभी उनके द्वारा संस्थापित, अखिल भारतीय रोहिला क्षत्रिय विकास परिषद रजिस्टर्ड,1988 ईस्वी संबद्ध अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा रजिस्टर्ड 1897ईस्वी के सानिध्य में ही बड़ी आशा के साथ पूर्ण करेंगे ।।।
*#सोलंकी_वंश_वीर_योद्धाओ_का_इतिहास*
*👉 दद्दा चालुक्य पहले राजपूत योद्धा थे जिन्होंने गजनवी को सोमनाथ मंदिर लूटने से रोका था।*
👉 भीमदेव द्वितीय ने मोहम्मद गोरी की सेना को 2 बार बुरी तरह से हराया और मोहम्मद गोरी को दो साल तक गुजरात के कैद खाने में रखा और बाद में छोड़ दिया जिसकी वजह से मोहम्मद गोरी ने तीसरी बार गुजरात की तरफ आँख उठाना तो दूर जुबान पर नाम तक नहीं लिया ।
👉 सोलंकी सिद्धराज जयसिंह इनके बारे में तो जितना कहे कम है 56 वर्ष तक गुजरात पर राज किया सिंधदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान का कुछ भाग, सोराष्ट्र, तक इनका राज्य था सबसे बड़ी बात तो यह है की यह किसी अफगान, और मुग़ल से युद्ध भूमि में हारे नहीं बल्कि उनको धुल चटा देते थे सिद्धराज जयसिंह और कुमारपाल ने व्यापार के नए-नए तरीके खोजे जिससे गुजरात और राजस्थान की आर्थिक स्थितिया सुधर गयी गरीबो को काम मिलने लगा और सब को काम की वजह से उनके घर की स्थितियां सुधर गयी।
👉 पुलकेशी महाराष्ट्रा, कर्नाटक, आँध्रप्रदेश तक इनका राज्य था इनके समय भारत में ना तो मुग़ल आये थे और ना अफगान थे उस समय राजपूत राजा आपस में लड़ाई करते थे अपना राज्य बढ़ाने के लिए।
👉 किल्हनदेव सोलंकी ( टोडा-टोंक ) इन्होने दिल्ली पर हमला कर बादशाह की सारी बेगमो को उठाकर टोंक के नीच जाति के लोगो में बाट दिया क्यूंकि दिल्ली का सुलतान बेगुनाह हिन्दुओ को मारकर उनकी बीवी, बेटियों, बहुओ को उठाकर ले जाता था इनका राज्य टोंक, धर्मराज, दही, इंदौर, मालवा तक फैला हुआ था।
👉 मांडलगढ़ के बल्लू दादा ने अकेले ही अकबर के दो खास ख्वाजा अब्दुलमाजिद और असरफ खान की सेना का डट कर मुकाबला किया और मौत के घाट उतार दिया हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप के साथ युद्ध में काम आये बल्लू दादा के बाद उनके पुत्र नंदराय ने मांडलगढ़ – मेवाड की कमान अपने हाथों में ली इन्होने मांडलगढ़ की बहुत अच्छी तरह देखभाल की लेकिन इनके समय महाराणा प्रताप जंगलो में जिवन गुजार रहे थे और अकबर ने मान सिंह के साथ मिलकर मांडलगढ़ पर हमला कर दिया और सभी सोलंकियों ने उनका मुकाबला किया और लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
👉 वच्छराज सोलंकी इन्होने गौ हथ्यारो को अकेले ही बिना सैन्य बल के लड़ते हुए धड काटने के बाद भी 32 किलोमीटर तक लड़ते हुए गए अपने घोड़े पर और गाय चोरो को एक भी गाय नहीं ले जने दी और सब को मौत के घात उतार कर अंत में वीरगति को प्राप्त हो गए जिसकी वजह से आज भी गुजरात की जनता इनकी पूजती है और राधनपुर-पालनपुर में इनका एक मंदिर भी बनाया हुआ है।
👉 भीमदेव प्रथम जब 10-11 वर्ष के थे तब इन्होने अपने तीरे अंदाज का नमूना महमूद गजनवी को कम उमर में ही दिखा दिया था महमूद गजनवी को कोई घायल नहीं कर पाया लेकिन इन्होने दद्दा चालुक्य की भतीजी शोभना चालुक्य (शोभा) के साथ मिलकर महमूद गजनवी को घायल कर दिया और वापस गजनी-अफगानिस्तान जाने पर विवश कर दिया जिसके कारण गजनवी को सोमनाथ मंदिर लूटने का विचार बदलकर वापस अफगानिस्तान जाना पड़ा।
👉 कुमारपाल इन्होने जैन धर्म की स्थापना की और जैनों का साथ दिया गुजरात और राजस्थान के व्यापारियों को इन्होने व्यापार करने के नए – नए तरीके बताये और वो तरीके राजस्थान के राजाओ को भी बेहद पसंद आये और इससे दोनों राज्यों की शक्ति और मनोबल और बढ़ गया और गुजरात, राजस्थान की जनता को काम मिलने लगे जिससे उनके घरो का गुजारा होने लगा।
👉 राव सुरतान के समय मांडू सुल्तान ने टोडा पर अधिकार कर लिया तब बदनोर – मेवाड की जागीर मिली राणा रायमल उस समय मेवाड के उतराधिकारी थे राव सुरतान की बेटी ने शर्त रखी मैं उसी राजपूत से शादी करुँगी जो मुझे मेरी जन्म भूमि टोडा दिलाएगा।
तब राणा रायमल के बेटे राणा पृथ्वीराज ने उनका साथ दिया पृथ्वीराज बहुत बहादूर था और जोशीला बहुत ज्यादा था चित्तोड़ के राणा पृथ्वीराज, राव सुरतान सिंह और राजकुमारी तारा बाई ने टोडा-टोंक पर हमला किया और मांडू सुलतान को तारा बाई ने मौत के घाट उतार दिया और टोडा पर फिर से सोलंकियों का राज्य कायम किया।
👉 तारा बाई बहुत बहादूर थी उसने अपने वचन के मुताबिक राणा पृथ्वीराज से विवाह किया ऐसी सोलंकिनी राजकुमारी को सत सत नमन यहाँ पर मान सिंह और अकबर खुद आया था युद्ध करने और पूरे टोडा को 1 लाख मुगलों ने चारो और से गैर लिया सोलंकी सैनिको ने भी अकबर की सेना का सामना किया और अकबर के बहुत से सैनिको को मार गिराया और अंत में सब ने लड़ते हुए वीरगति पाई।
जय राजपूताना जय मां भवानी क्षत्रिय धर्म युगे युगे।
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डॉक्टर कर्ण वीर सिंह रोहिला अमर रहे।
राजमाता रामकुमारी देवी अमर रहे।
डॉक्टर शालीन सिंह रोहिला अमर रहे।
डॉक्टर इंद्र जीत सिंह कौर जिंदाबाद।
जय जय भवानी,जय कालिका चामुण्डा माता,
*जय जय मां शाकंभरी*
जय राजपूताना रोहिलखंड,बुंदेलखंड,
*जय जय राजपूताना*
*क्षत्रिय एकता जिंदाबाद*
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blogger, SAMAY SINGH PUNDIR
SAMAY SINGH PUNDIR
संगठन में शक्ति है
ReplyDeleteआभार
DeleteSanghe shakti sarvda
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